देहरादून–ऋषिकेश प्रवास से लौटीं पीएम मोदी की बहन बसंती बेन, पूरे दौरे में मीडिया से रहीं दूर

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बसंती बेन

बसंती बेन

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहन बसंती बेन और बहनोई हंसमुख लाल उत्तराखंड प्रवास पूरा कर शुक्रवार को वापस लौट गए। उनका यह दौरा बेहद शांत और निजी रहा, जिसमें उन्होंने किसी भी तरह की मीडिया बातचीत से दूरी बनाए रखी। ऋषिकेश से देहरादून तक के यात्रा कार्यक्रम को सादगी के साथ सम्पन्न किया गया।

जानकारी के अनुसार, बसंती बेन उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण से बेहद प्रभावित दिखीं। उन्होंने ऋषिकेश में गंगा आरती में हिस्सा लिया और देहरादून के कई शांत स्थानों का भ्रमण किया। पूरे प्रवास के दौरान नरेंद्र मोदी विचार मंच उत्तराखंड की टीम ने उनका स्वागत और सत्कार किया। इस अवसर पर बसंती बेन को गढ़वाल का पारंपरिक अंगवस्त्र भेंट किया गया, जबकि हंसमुख भाई को गढ़वाली टोपी पहनाकर सम्मानित किया गया। स्मृति चिह्न के रूप में उन्हें प्रसिद्ध वीरांगना “तीलू रौतेली” की मूर्ति भी भेंट की गई, जिसे उन्होंने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत प्रतीक बताया।

बसंती बेन ने अपने प्रवास के दौरान स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की, हालांकि उन्होंने किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी करने से परहेज किया। पूरे कार्यक्रम में उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी, जिससे उनका यह दौरा पूरी तरह निजी स्वरूप में ही रहा। आयोजनकर्ताओं का कहना है कि बसंती बेन ने खास तौर पर सरल और बिना भीड़भाड़ का वातावरण पसंद किया तथा राज्य की आध्यात्मिकता और शांत पहाड़ी संस्कृति का अनुभव लिया।

उनकी सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखते हुए यात्रा कार्यक्रम को बेहद सीमित रखा गया। देहरादून और ऋषिकेश के प्रमुख स्थलों पर उन्होंने कुछ समय रुककर स्थानीय परंपराओं और व्यंजनों के बारे में भी जाना।

नरेंद्र मोदी विचार मंच उत्तराखंड ने बताया कि बसंती बेन का यह प्रवास उत्तराखंड की सांस्कृतिक समृद्धि को और अधिक नजदीक से जानने के उद्देश्य से था। उन्हें राज्य की परंपराओं, लोक संस्कृति और अतिथि सत्कार की परंपरा ने प्रभावित किया।

उनके लौटते ही स्थानीय लोगों और संगठन के पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाओं के साथ विदाई दी। इस शांत और सरल प्रवास ने एक बार फिर उत्तराखंड की ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा को जीवंत कर दिया।

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