अंकिता भंडारी केस: उर्मिला सनावर ने कोर्ट में मोबाइल जमा कराया, पूर्व विधायक सुरेश राठौर नहीं पहुंचे
उर्मिला सनावर
हरिद्वार। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वायरल ऑडियो मामले में शुक्रवार को जिला न्यायालय में Actress उर्मिला सनावर ने अपना मोबाइल फोन जमा कराया। कोर्ट में जमा कराए गए मोबाइल को न्यायालय की निगरानी में सील कर सुरक्षित रखा गया। यह कदम डिजिटल साक्ष्यों और मामले की जांच प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह एसआईटी ने उर्मिला सनावर से हरिद्वार में लगभग सवा छह घंटे तक पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान वीडियो के स्रोत, उसके प्रसार और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े कई अहम सवाल किए गए। आज मोबाइल जमा कराने के साथ ही न्यायालय ने आगे की जांच प्रक्रिया को सुरक्षित रखा।
इस दौरान प्रकरण में नामजद पूर्व विधायक सुरेश राठौर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। उनकी ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया और अगली सुनवाई तक का समय मांगा। अदालत ने आवेदन को संज्ञान में लेते हुए आगामी सुनवाई की तारीख तय कर दी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रोशनाबाद कोर्ट परिसर और आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अदालत परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए लगातार गश्त की जाती रही। इस दौरान मामले के विवेचक इंस्पेक्टर आरके सकलानी, इंस्पेक्टर योगेश दत्त और सिडकुल थाना प्रभारी नितेश शर्मा भी टीम के साथ अदालत में मौजूद रहे।
पुलिस ने मोबाइल जमा कराने की प्रक्रिया की निगरानी करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह संभाले रखा। सूत्रों के अनुसार, आगे की जांच में दोनों पक्षों के वॉयस सैंपल भी अदालत में जमा कराए जाएंगे। वॉयस सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
इस मामले में अदालत ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की। मामले की जांच और डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा को देखते हुए एसआईटी और न्यायालय ने प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से लिया है। फिलहाल अदालत और पुलिस सुरक्षा व्यवस्था के तहत जांच जारी है और अगली सुनवाई में मामलों के आगे के कदम तय किए जाएंगे।
इस घटना से साफ है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में डिजिटल साक्ष्यों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर जांच प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी ढांचे में हो रही है।
