बड़ा खुलासा: 2450 फर्जी राशन कार्डधारकों ने वर्षों तक गरीबों का हक छीना, विभाग ने शुरू की सख्त कार्रवाई
फर्जी राशन कार्डधारकों
ऊधमसिंह नगर जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत होने वाले राशन वितरण में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। जिले में 2450 ऐसे अपात्र परिवार पकड़े गए हैं, जिन्होंने फर्जी तरीकों से राशन कार्ड बनवाकर वर्षों तक गरीबों का सरकारी अनाज अपने घर पहुंचाया।
सिस्टम की लापरवाही और निगरानी तंत्र की कमजोरी ने इस घोटाले को इतना बड़ा रूप दे दिया कि असली जरूरतमंद खाली हाथ रह गए।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि अंत्योदय (AAY) श्रेणी में 205 और प्राथमिकता प्राप्त परिवार (PHH) यानी बीपीएल श्रेणी में 2245 लोग अपात्र होने के बावजूद लाभ उठा रहे थे। ये परिवार कई सालों से सरकारी योजना के तहत मिलने वाला चावल और गेहूं उठा रहे थे, जबकि यह राशन गरीब, निराश्रित और बेहद जरूरतमंद परिवारों के लिए निर्धारित था।
खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा जिलेभर में बड़े स्तर पर राशन कार्ड सत्यापन अभियान चलाया गया। 34,000 से अधिक कार्डों की जांच में 32,000 से अधिक पात्र पाए गए, लेकिन 2450 कार्ड ऐसे थे जो नियमों के अनुसार पूरी तरह अपात्र थे। विभाग अब इन सभी कार्डों को निरस्त करने की तैयारी में है और रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार सबसे ज्यादा अपात्र परिवार किच्छा क्षेत्र में मिले, जहां 621 फर्जी कार्डधारक सामने आए। वहीं बाजपुर में सबसे कम 125 कार्ड अपात्र पाए गए। कई क्षेत्रों में विशेष समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर फर्जी कार्ड बनवाकर सरकारी अनाज उठा रहे थे।
सरकार की ओर से राशन वितरण के स्पष्ट नियम तय हैं —
एपीएल: 5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले लोगों को पीला कार्ड मिलता है और सस्ता चावल दिया जाता है।
बीपीएल: 15,000 रुपये मासिक आय से कम वालों को सफेद कार्ड मिलता है और इन्हें मुफ्त अनाज मिलता है।
अंत्योदय: निराश्रित और बेहद गरीब परिवारों को प्रतिमाह 35 किलोग्राम राशन उपलब्ध कराया जाता है।
लेकिन अपात्र लोगों ने इन नियमों की अनदेखी करते हुए कार्ड बनवाए और बड़ी मात्रा में सरकारी राशन हड़प लिया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस दौरान सिस्टम पूरी तरह आंख मूंदे बैठा रहा।
अब विभाग इस घोटाले पर सख्त रुख अपना रहा है। अपात्र कार्डधारकों के कार्ड निरस्त होंगे और आगे दोषियों पर कार्रवाई की संभावना भी है। इस घोटाले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और मजबूत निगरानी की जरूरत को उजागर कर दिया है।
