Chamoli News: कुनीगाड़ और मेहलचौरी में दहशत का पर्याय बना गुलदार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

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गुलदार

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चमोली जिले के गैरसैंण क्षेत्र अंतर्गत कुनीगाड़ और मेहलचौरी गांवों में बीते कई दिनों से आतंक का पर्याय बने गुलदार को आखिरकार वन विभाग की टीम ने पिंजरे में कैद कर लिया है। गुलदार के पकड़े जाने के बाद पूरे क्षेत्र में राहत का माहौल है और ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम का आभार जताया है।

बताया जा रहा है कि गुलदार ने पिछले कुछ दिनों में करीब डेढ़ दर्जन मवेशियों को अपना निवाला बना लिया था, जिससे ग्रामीणों में भारी दहशत व्याप्त थी। रात के समय लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे थे। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण बेहद चिंतित थे। लगातार बढ़ती घटनाओं के चलते ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग की थी।

स्थानीय लोगों की शिकायत पर वन विभाग की टीम पिछले 25 दिनों से क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही थी और गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाकर निगरानी रखी जा रही थी। वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप गौड़ ने बताया कि 25 जनवरी की देर रात रंगचौंड़ा क्षेत्र में करीब नौ बजे गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। इसके बाद तुरंत टीम मौके पर पहुंची और गुलदार को सुरक्षित वाहन में रखकर गैरसैंण मुख्यालय लाया गया।

गैरसैंण पहुंचने पर पशु चिकित्सक डॉ. कामेश कनौजिया द्वारा गुलदार का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में गुलदार पूरी तरह सक्रिय पाया गया, हालांकि उसके शरीर पर हल्की खरोंच के निशान थे। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसे स्वस्थ घोषित किया गया।

वन विभाग के अनुसार गुलदार को हरिद्वार के पास स्थित चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा, जहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी देखभाल की जाएगी।

गुलदार की गिरफ्तारी के बाद कुनीगाड़ और मेहलचौरी क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद अब वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग की तत्परता और सतर्कता की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई से किसी बड़े हादसे को टाल दिया गया।

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