देहरादून हिट एंड रन: पीड़ित दर-दर भटका, आरोपी से ‘दोस्ती’ निभाती रही पुलिस
बसंत विहार
देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र से सामने आया हिट एंड रन का मामला उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि पुलिस ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय आरोपी का साथ दिया और समझौते का दबाव बनाकर कानून व मानवता—दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया।
घटना तीन दिसंबर 2025 की है। जीएमएस रोड स्थित शक्ति एन्क्लेव निवासी 73 वर्षीय राजेश चड्ढा सुबह दूध लेने निकले थे। इसी दौरान गलत दिशा से तेज रफ्तार बाइक लेकर आ रहे एक युवक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बुजुर्ग सड़क पर लहूलुहान होकर गिर पड़े। हादसे के बाद आरोपी मदद करने के बजाय मौके से फरार हो गया।
इस दुर्घटना में राजेश चड्ढा के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, सात टांके लगे और घुटने की हड्डी टूट गई। उन्हें अस्पताल में बड़े ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। पीड़ित की बेटी अनुष्का के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया, लेकिन चौकी से थाने तक कई दिन भटकने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। थानाध्यक्ष से मिलने पर भी हर बार टाल-मटौल किया गया।
आरोप है कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाया। हालात तब और चौंकाने वाले हो गए जब अनुष्का ने खुद घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और आरोपी का नाम-पता निकाल लिया। इसके बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया, बल्कि पीड़ित का पता और मोबाइल नंबर आरोपी को दे दिया, ताकि समझौते का दबाव बनाया जा सके।
पीड़ित परिवार का कहना है कि न्याय की गुहार लगाते-लगाते 38 दिन बीत गए, तब जाकर प्राथमिकी दर्ज की गई। इस देरी ने न सिर्फ पीड़ित को मानसिक पीड़ा दी, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए।
वहीं, थानाध्यक्ष अशोक राठौड़ का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की बातचीत चल रही थी, इसी वजह से प्राथमिकी दर्ज करने में देरी हुई। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर हिट एंड रन मामलों में समझौते का कोई प्रावधान नहीं होता और पुलिस की जिम्मेदारी तत्काल मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की होती है।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या आम नागरिक को न्याय के लिए खुद ही सबूत जुटाने पड़ेंगे, या फिर कानून का भरोसा अब भी कायम है?
