पौड़ी में वन्यजीवों का बढ़ता खतरा: पांच साल में 27 मौतें, 105 लोग घायल—गुलदार का आतंक फिर चर्चा में
गुलदार
पौड़ी जिले में मानव–वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में केवल पौड़ी गढ़वाल वन प्रभाग में गुलदार के हमलों में 27 लोगों की मौत और 105 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि 2022 सबसे ज्यादा भयावह रहा, जब सात लोगों ने अपनी जान गंवाई। इस साल भी गुलदार ने पांच ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया और 25 लोग घायल हुए हैं।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, गुलदार के हमले इस साल सबसे पहले जून में पूर्वी अमेली रेंज में दर्ज किए गए। इसके बाद सितंबर और नवंबर में पोखड़ा रेंज में दो और घटनाओं में लोगों की जान चली गई। वहीं 20 नवंबर और 4 दिसंबर को पौड़ी रेंज में दो लोगों की मौत हुई। यह स्थिति बताती है कि वन्यजीवों की गतिविधि लगातार मानव बस्तियों के करीब होती जा रही है।
गंभीर समस्या यह भी है कि गढ़वाल वन प्रभाग की छह रेंज कर्मचारियों की भारी कमी झेल रही हैं। डिप्टी रेंजर के 12 पदों में से केवल तीन पर ही नियुक्ति है। कई रेंजों में एक भी डिप्टी रेंजर तैनात नहीं है। इसी तरह वन दरोगा और वन आरक्षी के कई पद भी खाली हैं, जिससे गश्त और निगरानी प्रभावित हो रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गजल्ड, कोटी और डोभाल ढांडरी जैसे गुलदार प्रभावित इलाकों में चार शूटर तैनात किए गए हैं। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार दिखाई तो देता है, पर शूटरों की रेंज में नहीं आता। विभाग का कहना है कि गांवों में नियमित गश्त, जागरूकता अभियान और वन्यजीव गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी देने के लिए व्हाट्सऐप समूह और सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
प्रमुख सचिव वन और विभागीय अधिकारियों की हालिया बैठक में प्रभावित क्षेत्रों में क्या करें–क्या न करें की जानकारी बांटने, झाड़ी कटान बढ़ाने और 15 अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग जैसे कदमों पर जोर दिया गया है। वहीं जिलाधिकारी ने बताया कि सुरक्षा के लिए कई गांवों में स्कूल और आंगनबाड़ी के समय में बदलाव किया गया है।
लगातार बढ़ती घटनाओं ने ग्रामीणों में डर का माहौल बना दिया है। लोगों की मांग है कि वन विभाग ठोस कार्रवाई करे ताकि बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
