देहरादून में रिस्पना–बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर को बड़ी राहत: कैबिनेट ने जीएसटी और रॉयल्टी में 571 करोड़ की छूट दी

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एलिवेटेड कॉरिडोर

एलिवेटेड कॉरिडोर

देहरादून में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए प्रस्तावित रिस्पना और बिंदाल एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को उत्तराखंड सरकार ने बड़ी वित्तीय राहत दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए जीएसटी और रॉयल्टी में बड़े पैमाने पर छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का कहना है कि इससे परियोजनाओं के निर्माण की गति बढ़ेगी और देहरादून की यातायात समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में तेजी आएगी।

कैबिनेट के अनुसार, पूरे प्रोजेक्ट पर 525 करोड़ रुपये का जीएसटी और 46 करोड़ रुपये की रॉयल्टी की छूट दी जाएगी। कुल मिलाकर 571 करोड़ की यह राहत राज्य सरकार के लिए एक बड़े निवेश की तरह देखी जा रही है, क्योंकि आने वाले समय में राजधानी के मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक प्रेशर को कम करने में यह कॉरिडोर अहम भूमिका निभाएगा।

इन दोनों एलिवेटेड कॉरिडोरों का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने यह सहमति पहले ही दे दी है कि सिविल निर्माण कार्य का पूरा खर्च केंद्र वहन करेगा। हालांकि इसके लिए एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है—राज्य सरकार भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग का पूरा व्यय स्वयं वहन करेगी।

अधिकारियों के अनुसार, देहरादून शहर में लगातार बढ़ रही आबादी और वाहनों की संख्या के कारण मुख्य मार्गों पर जाम एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। खासकर रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्र से गुजरने वाला ट्रैफिक शहर को बार-बार जाम की स्थिति में धकेलता है। चार लेन के इन एलिवेटेड कॉरिडोरों के बनने से शहर में न केवल जाम कम होगा, बल्कि दून की सड़कों पर वाहन संचालन भी काफी सुगम हो जाएगा।

कैबिनेट का यह फैसला शहर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का दावा है कि छूट मिलने से परियोजना का वित्तीय बोझ कम होगा और निर्माण तेजी से आगे बढ़ सकेगा। आने वाले समय में भूमि अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का काम शुरू हो जाएगा, जिससे देहरादून को ट्रैफिक से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

 

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