सीमांत जादूंग गांव की वापसी, चीन युद्ध के बाद उजड़ा गांव अब पर्यटन से फिर होगा आबाद
जादूंग गांव
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित सीमावर्ती जादूंग गांव, जो 1962 के भारत–चीन युद्ध के बाद खाली हो गया था, अब एक बार फिर आबाद होने जा रहा है। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इस ऐतिहासिक गांव को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रदेश सरकार की पहल पर गांव में मूल निवासियों को वापस बसाने के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
नेलांग घाटी के पास स्थित जादूंग गांव रणनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। युद्ध के बाद सुरक्षा कारणों से गांव को खाली करा लिया गया था, जिसके चलते यहां दशकों तक सन्नाटा पसरा रहा। अब सरकार ने इस गांव को दोबारा जीवन देने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
पर्यटन विभाग की ओर से गांव के 23 परिवारों को पहाड़ी शैली में घर उपलब्ध कराए जाएंगे। पहले चरण में गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) द्वारा छह घरों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इन घरों को पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला के अनुरूप बनाया जा रहा है, ताकि स्थानीय संस्कृति और पहचान बनी रहे।
सरकार की योजना के तहत जादूंग गांव में सड़क, बिजली, पानी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इसके साथ ही गांव को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और सीमांत जीवन को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि मूल निवासियों को वापस बसाने से न केवल जादूंग गांव फिर से आबाद होगा, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और सीमांत क्षेत्रों में जनसंख्या स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि जादूंग गांव का पुनर्वास सीमांत क्षेत्रों के विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यटन विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
