उत्तराखंड भाजपा में बड़े फेरबदल की तैयारी, चुनाव से पहले विवादित चेहरों को साइडलाइन करने की रणनीति

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भाजपा में बड़े फेरबदल

भाजपा में बड़े फेरबदल

उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर नए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद अब प्रदेश संगठन में भी बदलाव लगभग तय माने जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा अब साफ-सुथरी छवि, लोकप्रियता और संगठनात्मक क्षमता वाले चेहरों को ही आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।

पार्टी नेतृत्व का साफ संदेश है कि चुनावी मैदान में ऐसे नेताओं को फ्रंट पर न रखा जाए, जिनको लेकर आम जनता में नकारात्मक धारणा बनी हो या जो पहले किसी विवाद में घिरे रहे हों। भाजपा का मानना है कि लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लिए संगठन और सरकार—दोनों की छवि बेदाग दिखनी चाहिए। यही वजह है कि संगठन में उन चेहरों को बदलने की कवायद शुरू हो गई है, जिनसे पार्टी को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

उत्तराखंड में बीते नौ वर्षों से सत्ता में काबिज भाजपा इस बार किसी भी स्तर पर चूक नहीं करना चाहती। हाल ही में सभी सात मोर्चों के अध्यक्षों और उनकी टीमों की घोषणा कर संगठनात्मक ढांचे को मजबूत किया गया है। अब फोकस ऐसे नेताओं पर है, जो जमीन से जुड़े हों, कार्यकर्ताओं में स्वीकार्य हों और चुनाव के दौरान पार्टी के लिए सकारात्मक माहौल बना सकें।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय नेतृत्व युवाओं को विशेष तवज्जो देने के पक्ष में है। हाल के महीनों में पार्टी ने कई अहम पदों पर युवा चेहरों को जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर भी इसी तर्ज पर बदलाव होंगे। इससे न सिर्फ युवाओं और नए मतदाताओं को साधने में मदद मिलेगी, बल्कि पार्टी के लिए भविष्य की एक मजबूत नेतृत्व पंक्ति भी तैयार होगी।

भाजपा संगठन यह भी चाहता है कि चुनावी समय में विरोधियों को मुद्दा देने वाले चेहरे पीछे रहें। इसलिए जिन नेताओं का नाम किसी विवाद से जुड़ा रहा है, उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटाया जा सकता है या फिर पर्दे के पीछे की भूमिका दी जा सकती है।

कुल मिलाकर, भाजपा की रणनीति साफ है—कम विवाद, ज्यादा भरोसा। साफ छवि, युवा नेतृत्व और लोकप्रिय चेहरों के सहारे पार्टी एक बार फिर उत्तराखंड की सत्ता पर कब्जा बरकरार रखने की तैयारी में जुट गई है। संगठन में संभावित फेरबदल को इसी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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