उत्तराखंड में 85 लाख में से 59 लाख मतदाताओं की मैपिंग पूरी, SIR में नहीं देने होंगे दस्तावेज
SIR
उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। चुनाव आयोग ने प्रदेश के कुल 85 लाख मतदाताओं में से 59 लाख से अधिक मतदाताओं की प्री-एसआईआर के तहत बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मैपिंग पूरी कर ली है। यह आंकड़ा करीब 67 प्रतिशत है। जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है, उन्हें आगे चलकर एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार के दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों पर पिछले करीब डेढ़ माह से प्री-एसआईआर के तहत बीएलओ मैपिंग का कार्य चल रहा था। शनिवार को इसका आखिरी दिन निर्धारित था, लेकिन मैदानी विधानसभा क्षेत्रों में अपेक्षित उत्साह नहीं दिखने के कारण अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा इसकी अवधि बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरी अवधि में 85 लाख मतदाताओं में से 59 लाख 17 हजार मतदाताओं की मैपिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई है। चुनाव आयोग का मानना है कि यह उपलब्धि संतोषजनक है, लेकिन अभी भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में चुनौती बनी हुई है। प्रदेश की 25 विधानसभा सीटों में बीएलओ मैपिंग का औसत राज्य के 67 प्रतिशत औसत से कम रहा है।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि जिन क्षेत्रों में मैपिंग कम रही है, वहां विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उद्देश्य यह है कि एसआईआर शुरू होने से पहले अधिक से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली जाए, ताकि बाद की प्रक्रिया सरल और विवादमुक्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है, उन्हें एसआईआर के दौरान किसी भी प्रकार के पहचान या पते से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने होंगे।
हरिद्वार, जसपुर, किच्छा, बाजपुर, बीएचईएल, राजपुर रोड, मसूरी, रायपुर, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, काशीपुर, रुद्रपुर और धर्मपुर जैसी विधानसभा सीटों में बीएलओ मैपिंग 50 प्रतिशत से भी कम रही है। इन क्षेत्रों को लेकर निर्वाचन विभाग की चिंता बढ़ गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि राज्य स्तर पर प्री-एसआईआर की शुरुआत बेहतर तैयारी के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने बताया कि 67 प्रतिशत का परिणाम उत्साहजनक है और अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर शेष मतदाताओं की मैपिंग पूरी करने पर जोर दिया जाएगा।
चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाया जाए, ताकि आने वाले चुनावों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या शिकायत की गुंजाइश न रहे।
